केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान शिमला ने 77 वें स्थापना दिवस समारोह मनाया

संस्थान के निदेशक डॉ. ब्रजेश सिंह ने सभी उपस्थित विशिष्ट जनों एवं अतिथियों का स्वागत किया तथा संस्थानके द्वारा किए गए कार्यों पर प्रकाश डाला उन्होने बताया की संस्थान ने भारत के प्रत्येक क्षेत्र और जलवायु के लिए आलू की खेती हेतु कुल 76 किस्में विकसित की हैं और 04 नयी क़िस्मों विकसित कर ली गयी हैं जो की जल्द हीं हितधारकों के लिए सरकार की अधिसूचना के बाद उपलब्ध होगी । उन्होने आलू उत्पादन के भंडारण और प्रसंस्करण हेतु कृषि तकनीकें, आलू आधारित फसल प्रणालियाँ, संसाधन प्रबंधन और फसल सुरक्षा के लिए तकनीकों की जानकारी दी ।
मुख्य अतिथि डॉ संजय सिंह ने अपने उद्बोधन में बताया कि पहले आलू की किस्में केवल लंबे दिनों और कम तापमान पर ही उग सकती थीं और यह वातावरण केवल ऊँचे पर्वतीय क्षेत्रों में ही उपलब्ध था। जिसके कारण मैदानी इलाकों में आलू की खेती संभव नहीं थी। लेकिन केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान के अनुसंधान के बदौलत, यह फसल भारत के अन्य हिस्सों में भी फैल गई और यह किचन गार्डन से आगे बढ़कर भारतीय रसोई तक पहुँच गयी और आज भारत विश्व के अग्रणी आलू उत्पादक देशों की सूची में चीन के बाद दूसरे स्थान पर है। मेयर सुरेंद्र चौहान ने इस अवसर पर सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि इस तरह का उत्कृष्ट संस्थान न केवल शिमला शहर की पहचान है बल्कि आईसीएआर और विश्व के अव्वल संस्थानों की श्रेणी में आता है।
इस अवसर पर संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. तनुजा बक्सेठ, तकनीकी वर्ग से श्रीमती कुसुम सिंह, प्रशासनिक वर्ग से गुरुजीत सिंह एवं कुशल सहायक वर्ग से रणवीर सिंह को उनके उत्कृष्ट कार्यों पर संस्थान द्वारा बेस्ट वर्कर पुरस्कार से सम्मानित गया। संस्थान द्वारा राज्य के 27 उत्कृष्ट कृषकों को भी इस अवसर पर सम्मानित किया गया। डॉ. आरती बैरवा, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अश्वनी के. शर्मा, प्रभारी, कुफरी फागू इकाई डॉ. संजीव शर्मा, प्रमुख, पादप सुरक्षा डॉ. बृजेश सिंह को प्रशंसा प्रमाण पत्र पीसीएन क्वारंटाइन मुक्त बीज उत्पादन हेतु प्रदान किया गया।
इस दौरान मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि के सम्बोधन के अलावा शिमला स्थित स्कूल के बच्चों के ज्ञानवर्धन हेतु संस्थान द्वारा आलू पर किए जा रहे शोध पर प्रकाश डाला गया एवं उन्हें संस्थान की प्रयोगशालाएं दिखाई गई। संस्थान के कृषि अभियंताओं द्वारा विकसित कृषि यंत्रों का भी इस अवसर पर प्रदर्शन किया गया और इन उपकरणों को राष्ट्र के किसानों के उपयोग हेतु जारी किया गया। इस मौके पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अन्य संस्थानों द्वारा प्रदर्शनी का आयोजन भी किया गया।