अक्स न्यूज लाइन शिमला 28 मार्च :
भाजपा नेता एवं सांसद सुरेश कश्यप हिमाचल प्रदेश नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, शिमला द्वारा आयोजित “जनजातीय पहचान और शासन” विषयक राष्ट्रीय कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर उन्होंने जनजातीय समाज के अधिकार, पहचान, सांस्कृतिक विरासत और समग्र विकास पर अपने विचार व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं और पहलों का विस्तृत उल्लेख किया।
सांसद सुरेश कश्यप ने अपने संबोधन में महान जननायक भगवान बिरसा मुंडा को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कहा कि उनका संघर्ष और बलिदान आज भी जनजातीय समाज को आत्मसम्मान और अधिकारों के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने पहली बार जनजातीय नायकों को राष्ट्रीय पहचान दिलाई और 15 नवंबर को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया, जो वर्ष 2021 से पूरे देश में मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी का सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन होना जनजातीय समाज के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है, जो यह दर्शाता है कि आज भारत में हर वर्ग को समान अवसर और सम्मान मिल रहा है।
सांसद कश्यप ने कहा कि भाजपा सरकार ने जनजातीय समाज को केवल योजनाओं का लाभार्थी नहीं, बल्कि विकास की मुख्यधारा का सक्रिय भागीदार बनाया है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा जनजातीय क्षेत्रों के लिए लगभग ₹24,000 करोड़ का विशेष पैकेज दिया गया है, जिसमें सड़क, मोबाइल नेटवर्क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है।
शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने बताया कि एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS) के माध्यम से देशभर में 740 से अधिक विद्यालयों का लक्ष्य रखा गया है, जिससे 3.5 लाख से अधिक जनजातीय विद्यार्थियों को मुफ्त, गुणवत्तापूर्ण और आवासीय शिक्षा मिल रही है। आज दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चे भी IIT, NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त कर रहे हैं।
आर्थिक सशक्तिकरण के लिए वन धन विकास केंद्र (3000+ केंद्र) स्थापित किए गए हैं, जिनसे 10 लाख से अधिक जनजातीय परिवार जुड़े हैं। इसके साथ ही लघु वनोपज (MFP) पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) लागू कर बांस, शहद, लाख और तेंदू जैसे उत्पादों से जनजातीय समाज की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में आयुष्मान भारत योजना के तहत 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज सुनिश्चित किया गया है। जनजातीय क्षेत्रों में मोबाइल मेडिकल यूनिट्स, टेलीमेडिसिन और पोषण अभियान के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम गांव तक पहुंचाया गया है।
बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन के तहत लाखों जनजातीय घरों तक नल से जल पहुंचाया गया है, प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से पक्के घर उपलब्ध कराए गए हैं, और डिजिटल इंडिया के जरिए इंटरनेट की सुविधा दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंची है। इसके अलावा सड़क और बिजली जैसी सुविधाओं ने जनजातीय क्षेत्रों को पहली बार मुख्यधारा से जोड़ा है। अटल टनल जैसी परियोजनाओं ने कनेक्टिविटी और जीवन स्तर में क्रांतिकारी सुधार किया है।
उन्होंने विशेष रूप से PM-JANMAN योजना (2023) का उल्लेख करते हुए कहा कि यह देश के सबसे कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) के लिए एक ऐतिहासिक पहल है, जिसके माध्यम से अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक विकास और सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं।
सांसद कश्यप ने कहा कि केंद्र सरकार ने जनजातीय समाज की संस्कृति और गौरव को भी राष्ट्रीय मंच पर स्थापित किया है। Tribal Freedom Fighters Museums की स्थापना से नई पीढ़ी को जनजातीय नायकों के योगदान की जानकारी मिल रही है, वहीं आदि महोत्सव (Aadi Mahotsav) जैसे आयोजनों के माध्यम से जनजातीय कला, हस्तशिल्प और उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है।
उन्होंने कहा कि पहले जहां जनजातीय समाज “विकास से दूर” माना जाता था, आज वह “विकास का भागीदार” बन चुका है। यह परिवर्तन मोदी सरकार की दूरदर्शी नीतियों और ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के संकल्प का परिणाम है।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की ओर से कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) प्रीत सक्सेना, प्रोफेसर डॉ. हरीश कुमार, रजिस्ट्रार आलोक कुमार, डॉ. एस.एस. जसवाल सहित अनेक विद्वान उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त भाजपा के मंडल अध्यक्ष यशपाल, प्यार सिंह कंवर, बॉबी बंसल, सुमन, इंद्र सिंह ठाकुर तथा पारुल शर्मा सहित अन्य कार्यकर्ता भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
अंत में सांसद सुरेश कश्यप ने विश्वविद्यालय प्रशासन को इस सफल आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि ऐसे मंच जनजातीय समाज के अधिकारों, पहचान और विकास से जुड़े विषयों पर सार्थक संवाद को बढ़ावा देते हैं और भविष्य की नीतियों को और अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।