साल में दो बार जरूर करवाएं पशुओं का टीकाकरण, पशुपालन विभाग ने छत्रैल में आयोजित किया जागरुकता शिविर
इस अवसर पर डॉ. विश्वदीप राठौर ने बताया कि पशुओं को होने वाले खुरपका और मुंहपका रोग (एफएमडी) से बचाव हेतु टीकाकरण का सातवां दौर शुरू कर दिया गया है। उन्होंने पशुपालकों से आग्रह किया है कि वे अपने गौवंशीय और भैंसवंशीय पशुओं को नजदीकी पशु चिकित्सालय में टीके अवश्य लगवाएं। उन्होंने बताया कि पशुओं को वर्ष में दो बार 6 माह के अंतराल पर टीके जरूर लगवाने चाहिए। इसके साथ ही पशुओं की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें और किसी रोग की चपेट में आने पर तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें। पहला टीकाकरण पशु के तीन या चार माह की उम्र में करवाना चाहिए। अगर कोई पशु खुरपका या मुंहपका रोग की चपेट में आता है तो उसे अन्य पशुओं से अलग रखा जाए।
डॉ. विश्वदीप राठौर ने बताया कि यह रोग प्रभावित पशुओं के सीधे संपर्क में आने से, गंदे पानी या बर्तन तथा दूषित चारे के प्रयोग से फैलता है। शुरुआत में पशु को तेज बुखार, आलसीपन, अत्यधिक लार का चलना, मुंह और पैर पर फ़फोलों का होना इस रोग के मुख्य लक्षण होते हैं। इससे बचाव के लिए पशुओं को 6 माह में टीका जरूर लगवाएं। टीकाकरण से लगभग 15 दिन पहले पशु की डी-वार्मिंग करें और उसका पंजीकरण करें। पशु को साफ रखें और वैक्सीनेशन के दिन उसे थकाए नहीं।
डॉ. विश्वदीप राठौर ने पशुओं की खुराक के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने पशुपालकों से विभाग की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाने की अपील भी की। इस अवसर पर ग्राम पंचायत बारीं के पूर्व प्रधान रविंद्र ठाकुर ने पशु चिकित्सकों और सभी ग्रामीणों का धन्यवाद किया। इस दौरान विभाग के एएचए यशवंत सिंह, फार्मासिस्ट सुभाष रिंकू, स्थानीय निवासी मस्त राम, राकेश चंद, प्रकाश चंद, सुभाष चंद, बलबीर सिंह, प्रकाश चंद, देश राज, राकेश कुमार, रमेश चंद, सुरेश कुमार, महिला मंडल की प्रधान मनोरमा देवी और अन्य लोग भी उपस्थित रहे।




