वन संरक्षण से पारिस्थितिक संतुलन एवं समावेशी विकास की दिशा में प्रतिबद्ध ‘सुक्खू सरकार’ · वर्ष 2024-25 में वन विभाग ने अर्जित की 7.43 करोड़ रुपए की आय

वन संरक्षण से पारिस्थितिक संतुलन एवं समावेशी विकास की दिशा में प्रतिबद्ध ‘सुक्खू सरकार’ ·         वर्ष 2024-25 में वन विभाग ने अर्जित की 7.43 करोड़ रुपए की आय
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अक्स न्यूज लाइन  मंडी, 17 जून :
हिमालय की गोद में बसा हिमाचल अपनी अपार वन संपदा के लिए विख्यात है। प्रदेश सरकार द्वारा वन संसाधनों के संरक्षण, सुरक्षा एवं सतत प्रबंधन के उद्देश्य से विभिन्न विकासात्मक एवं संरक्षणात्मक गतिविधियां क्रियान्वित की जा रही हैं। इनका मुख्य उद्देश्य पारिस्थितिक संतुलन बनाये रखना तथा जन सहभागिता को सुदृढ़ करना है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की पहल पर शुरू की गई राजीव गांधी वन संवर्द्धन योजना सहित अनेक योजनाएं एवं कार्यक्रम वन संपदा की वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

पूरे प्रदेश सहित मंडी जिला में भी इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है। मंडी वन वृत के अन्तर्गत जिला मंडी का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल लगभग 3950 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें से लगभग 1887 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र वन अच्छादित है, जो कुल क्षेत्रफल का करीब 47.77 प्रतिशत है।

वन वृत्त मंडी में राजीव गांधी वन संवर्द्धन योजना के अन्तर्गत वन विकास एवं आजीविका संवर्द्धन में स्थानीय समुदायों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने के विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। इस योजना का उद्देश्य हरित आवरण में वृद्धि, वन आधारित आजीविका को सुदृढ़ करना तथा स्थानीय लोगों में स्वामित्व की भावना विकसित करना है। लाभार्थियों की सहभागिता से पौधरोपण, वन भूमि सुधार एवं संबंधित गतिविधियाँ क्रियान्वित की जा रही हैं। योजना के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान 121.5 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए कार्य स्वीकृत किए गए, जिनके लिए लगभग एक करोड़ 24 लाख 20 हजार रुपए की वित्तीय राशि आवंटित की गई। इस दौरान 102.5 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधारोपण कार्य पूर्ण किया गया तथा लगभग एक करोड़ से अधिक की वित्तीय उपलब्धि अर्जित की गई। योजना के अन्तर्गत 74 महिला मंडल व युवक मंडलों को लाभान्वित कर 1,22,857 पौधे/पालियों का वितरण किया गया।

पर्यावरण संरक्षण एवं जलवायु स्वच्छ बनाए रखने में वनों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। वहीं, वन संपदा के माध्यम से आय अर्जित करने के भी बेहतर साधन सृजित हो रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान वन विभाग द्वारा विभिन्न स्त्रोतों से लगभग 7 करोड़ 42 लाख 55 हजार रुपए का राजस्व अर्जित किया गया। इसमें काष्ठ एवं अन्य वन उपज, औषधीय पौधों सहित लघु वन उपज, चराई एवं घास तथा विभिन्न उत्पादों से प्राप्त आय शामिल है।

प्रमुख वन उपज के अन्तर्गत लगभग 7712 घन मीटर औद्योगिक लकड़ी का उत्पादन किया गया, जिसमें देवदार, चीड़, कैल, फर/स्प्रूस तथा अन्य चौड़ी पत्ती प्रजातियाँ शामिल हैं। इनसे लगभग 4 करोड़ 42 लाख 71 हजार रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ। लघु वन उपज के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2024-25 में बिरोजा, औषधीय जड़ी-बूटी एवं अन्य लघु उत्पादों से महत्वपूर्ण उत्पादन एवं राजस्व अर्जित किया गया, जिसका कुल मूल्य 5 करोड़ 33 लाख रुपए से अधिक रहा।

इसके अतिरिक्त जल संग्रहण संरचनाओं के अन्तर्गत 61 जल तालाबों का निर्माण किया गया जिनकी कुल जल धारण क्षमता 61 हजार घन मीटर है। पौधारोपण, पुनर्जनन एवं वन संसाधनों की सुरक्षा के क्षेत्र में विशेष प्रयास करते हुए लगभग 861 हेक्टेयर भूमि पर पौधरोपण किया गया। वन वृत्त मंडी में वन अधिकार अधिनियम-2006 (एफआरए) के तहत वर्ष 2025-26 में 59 प्रकरण स्वीकृत कर लगभग 21 हेक्टेयर क्षेत्र आवंटित किया गया।

पर्यावरणीय जागरूकता बढ़ाने एवं स्थानीय लोगों को आजीविका के अवसर सृजित करने के लिए मंडी वृत्त के विभिन्न क्षेत्रों में ईको-पर्यटन एवं प्रकृति संरक्षण गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। वृत्त के अन्तर्गत पाँच वन मंडलों में ईको-पर्यटन परिसंपत्तियों का अनुरक्षण एवं उन्नयन किया गया। नियमित गश्त, वन अग्नि रोकथाम उपायों एवं जन जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से वन सुरक्षा गतिविधियों को भी सुदृढ़ किया गया। वनों की आग की रोकथाम के दृष्टिगत फायर लाइनों का निर्माण एवं रख-रखाव तथा सामुदायिक सहभागिता से संबंधित कार्य 315 कि.मी. क्षेत्रों पर किए गए।
वन संरक्षण, पारिस्थितिक संतुलन एवं समावेशी विकास की दिशा में ‘सुक्खू सरकार’ के यह प्रतिबद्ध प्रयास पर्यावरणीय स्थिरता एवं सामुदायिक कल्याण में सकारात्मक योगदान दे रहे हैं।