प्रदेश में कोकून का एमएसपी बढ़ने से रेशमकीट पालकों को मिल रहे हैं बेहतर दाम...खुली बोली से किसानों को मिला 1,960 रूपये प्रति किलो तक का अधिकत्तम मूल्य

प्रदेश में कोकून का एमएसपी बढ़ने से रेशमकीट पालकों को मिल रहे हैं बेहतर दाम...खुली बोली से किसानों को मिला 1,960 रूपये प्रति किलो तक का अधिकत्तम मूल्य
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अक्स न्यूज लाइन  बिलासपुर  13 जून :
 हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा कोकून के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में की गई उल्लेखनीय वृद्धि तथा खुली बोली प्रणाली के माध्यम से किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त हो रहा है। सरकार के इस महत्वपूर्ण कदम से प्रदेश में न केवल रेशम कीट उत्पादन क्षेत्र को नई गति मिली है बल्कि कोकून उत्पादन में वृद्धि दर्ज होने के साथ-साथ किसानों की आय में भी बढ़ौतरी हो रही है। जिला बिलासपुर के घुमारवीं स्थित कोकून मंडी में खुली बोली के माध्यम से कोकून को 1,960 रूपये प्रति किलोग्राम तक का रिकॉर्ड मूल्य प्राप्त हुआ है, जो राज्य के रेशम कीट पालन क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
घुमारवीं कोकून मंडी में गांव पटटा तहसील घुमारवीं से पहुंची किसान मीरा देवी से बातचीत की तो उनका कहना है कि वह पिछले लगभग 40-50 वर्षों से रेशम कीट पालन का कार्य कर रही है, इससे उन्हें काफी लाभ मिला है। उन्होंने कहा कि वर्ष में मात्र 20 से 25 दिन रेशम कीट पालन के कार्य को बेहतर ढ़ंग से कर लिया जाए तो किसान एक अच्छी अतिरिक्त आमदनी प्राप्त कर सकता है। उन्होंने ज्यादा से ज्यादा किसानों से रेशम कीट पालन से जुड़कर अतिरिक्त आय सृजित करने का आह्वान किया है।
इसी तरह घुमारवीं क्षेत्र के गांव लढे़त के किसान विशन दास शर्मा का कहना है कि रेशमकीट पालन के कार्य को मात्र एक या दो सप्ताह कड़ी मेहनत करके किया जाए तो किसान कोकून बेचकर एक अच्छी अतिरिक्त आदमी प्राप्त कर सकते हैं। उनका कहना है कि कोकून का मार्केट में औसतन दाम एक हजार से लेकर 1500 रूपये प्रति किलोग्राम तक आसानी से प्राप्त हो जाता है। उन्होंने किसानों विशेषकर बेरोजगार युवाओं से रेशम कीट पालन को अतिरिक्त आय सृजन का स्त्रोत बनाने के लिए जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इस कार्य में बेहद कम लागत पर अच्छी आय प्राप्त की जा सकती है।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इस वर्ष ए-ग्रेड कोकून का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1,100 रूपये से बढ़ाकर 1,280 रूपये प्रति किलोग्राम निर्धारित किया है। इसके अतिरिक्त बी-ग्रेड कोकून के लिए 1,225 रूपये, सी-ग्रेड के लिए 1,150 रूपये तथा इन्फीरियर गुणवत्ता के कोकून के लिए 1,000 रूपये प्रति किलोग्राम न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया है।
रेशम कीट पालन क्षेत्र में प्रदेश सरकार के निरंतर प्रयासों के चलते जिला बिलासपुर में रेशम उत्पादन से जुड़े किसानों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई है। इस वर्ष जिला बिलासपुर के लगभग 3,000 किसानों ने कोकून बेचने को पंजीकरण करवाया है, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 1,750 थी।
प्रदेश सरकार ने रेशम कीट पालन क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने को वर्ष 2026-27 में हिम सिल्क मिशन की शुरूआत करते हुए 2 करोड़ रूपये का बजटीय प्रावधान किया है। इस मिशन के अंतर्गत शहतूत पौधरोपण का विस्तार, उच्च गुणवत्तायुक्त कोकून उत्पादन को बढ़ावा देना, आधुनिक तकनीकों का प्रसार, विपणन सुविधाओं का सुदृढ़ीकरण तथा युवाओं एवं महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष बल दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन और मूल्य संवर्धन की पूरी रेशम श्रृंखला को मजबूत बनाकर किसानों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करना है।
जिला बिलासपुर में इस लगभग 6.6 मीट्रिक टन कोकून उत्पादन होने की संभावना है, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 5.4 मीट्रिक टन दर्ज रहा था।
क्या कहते हैं अधिकारी:
उपनिदेशक रेशम बलदेव चैहान ने बताया कि प्रदेश सरकार रेशम कीट पालन को बढ़ावा देने के लिए अनेक योजनाओं को क्रियान्वित कर रही है, जिसमें सिल्क समग्र-दो, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना तथा राज्य उत्प्रेरक विकास योजना शामिल है। इन योजनाओं के माध्यम से रेशम कीट पालन भवन निर्माण सहायता, रेशम कीट पालन सामग्री के साथ-साथ प्रशिक्षण तथा जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किये जाते हैं।
उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार प्रति किसान 80 रुपये में रेशम कीट का बीज उपलब्ध करवा रही है, जिससे एक किसान 15 से 20 किलोग्राम सूखा कोकून तैयार कर लगभग 20 से 25 हजार रुपये की अतिरिक्त आमदनी प्राप्त कर रहा है।
इस वर्ष घुमारवीं स्थित कोकून मंडी में कर्नाटक और पश्चिम बंगाल सहित विभिन्न राज्यों के व्यापारी खरीद प्रक्रिया में शामिल हुए हैं। प्रतिस्पर्धी बोली के कारण किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य से कहीं अधिक दाम प्राप्त हुए हैं। खुली बोली के दौरान कोकून को 1,960 रुपये प्रति किलोग्राम तक का रिकॉर्ड मूल्य प्राप्त हुआ है, जो राज्य के रेशम कीट पालन क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
उपायुक्त राहुल कुमार का कहना है कि हिमाचल सरकार की न्यूनतम समर्थन मूल्य नीति, उद्योग विभाग के रेशम अनुभाग के सतत प्रयासों और प्रतिस्पर्धी विपणन व्यवस्था का लाभ सीधे किसानों तक पहुंच रहा है। रेशम कीट पालन क्षेत्र में आ रहा यह सकारात्मक बदलाव न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो रहा है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में भी एक मील का पत्थर साबित हो रहा है। जिला प्रशासन का भी यह प्रयास है कि ज्यादा से ज्यादा किसानों को रेशम कीट जैसे अतिरिक्त आय सृजन के साधनों से जोड़कर उनकी आर्थिकी मजबूत करना है।