मुख्यमंत्री सुखाश्रय योजना से रोहित के सपनों को मिला आशियाना ..उपायुक्त अनुपम कश्यप ने निर्माणाधीन घर का किया निरीक्षण,
अक्स न्यूज लाइन शिमला 11 जुलाई :
प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री सुखाश्रय योजना बेसहारा एवं अनाथ बच्चों के जीवन में नई उम्मीद का संचार कर रही है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू द्वारा शुरू की गई इस योजना के तहत "चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट" का दर्जा प्राप्त बच्चों को न केवल आर्थिक सुरक्षा प्रदान की जा रही है, बल्कि उनके सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन का मार्ग भी प्रशस्त किया जा रहा है।
इसी कड़ी में जिला शिमला में मुख्यमंत्री सुखाश्रय योजना के तहत 29 चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट के लिए स्थायी आवास निर्माण का कार्य प्रगति पर है। शुक्रवार देर सायं उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने शिमला ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत जनोल के गांव कियाना में योजना के लाभार्थी रोहित के निर्माणाधीन घर का निरीक्षण किया। इस अवसर पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा किया जाए, ताकि लाभार्थी शीघ्र अपने नए घर में प्रवेश कर सके।
निरीक्षण के दौरान एसडीएम शिमला ग्रामीण मंजीत शर्मा, जिला कार्यक्रम अधिकारी ममता पॉल, खंड विकास अधिकारी बृजेश तथा अन्य संबंधित अधिकारी भी उपस्थित रहे।
*संघर्षों से भरा जीवन, सुखाश्रय योजना बनी संबल*
रोहित का जीवन अनेक कठिन परिस्थितियों से होकर गुजरा है। वर्ष 2013 में मात्र 13 वर्ष की आयु में उन्होंने अपने पिता चुन्नी लाल को खो दिया, जो आईपीएच विभाग में कार्यरत थे। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। कुछ समय बाद उनकी माता विमला को विभाग में अनुकंपा के आधार पर चपरासी के पद पर नियुक्ति मिली, जिससे परिवार किसी तरह संभलने लगा। इस बीच बड़ी बहन का विवाह हो गया, लेकिन वर्ष 2019 में माता के निधन के बाद रोहित पूरी तरह अकेले हो गए। कुछ समय तक वे अपने दादा के साथ रहे।
वर्ष 2023 में मुख्यमंत्री सुखाश्रय योजना लागू होने के बाद रोहित को "चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट" का दर्जा मिला और उन्हें प्रतिमाह चार हजार रुपये की वित्तीय सहायता मिलने लगी। योजना के अंतर्गत विभाग ने उनके लिए आवास निर्माण की प्रक्रिया पूरी की और उन्हें तीन लाख रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की गई।
इसी सहायता से रोहित अपने लिए एक पक्का मकान बना रहे हैं, जिसमें एक कमरा, रसोईघर और स्नानघर की सुविधा होगी। हाल ही में भवन का लैंटर डाला गया है तथा रोहित ने प्रशासन को आश्वस्त किया है कि अगले दो महीनों में निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा। वर्तमान में वे दिहाड़ी मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। अक्टूबर 2025 में उनका विवाह हुआ और अब वे एक बच्चे के पिता भी हैं।
*योजना का प्रभाव धरातल पर दिखना चाहिए : उपायुक्त*
उपायुक्त अनुपम कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखाश्रय योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन बच्चों के जीवन को नई दिशा देने का एक संवेदनशील प्रयास है, जिन्होंने अपने माता-पिता का साया खो दिया है। उन्होंने कहा कि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा के साथ-साथ फील्ड में जाकर निर्माण कार्यों का निरीक्षण करना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि जिला के अन्य क्षेत्रों में भी मुख्यमंत्री सुखाश्रय योजना के तहत निर्माणाधीन आवासों का निरीक्षण किया जाएगा। सभी बाल विकास परियोजना अधिकारियों (सीडीपीओ) को निर्देश दिए गए हैं कि निर्माण कार्य पूर्ण होने तक प्रत्येक तीन माह में फोटो सहित प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि इन बच्चों तक सरकार की प्रत्येक सुविधा समय पर पहुंचे, यह जिला प्रशासन की प्राथमिकता है।
*मुख्यमंत्री का जताया आभार*
रोहित ने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू तथा जिला प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि माता-पिता के निधन के बाद उन्हें भविष्य अंधकारमय नजर आने लगा था। उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनका अपना घर भी बन पाएगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखाश्रय योजना ने उनके जीवन में नई आशा का संचार किया है। सरकार से मिली आर्थिक सहायता के कारण उनका सपना साकार हो रहा है और अब वे अपने परिवार के साथ सम्मानपूर्वक जीवन जीने की ओर अग्रसर हैं। उन्होंने कहा कि यह योजना उनके जैसे अनेक बेसहारा युवाओं के लिए नई जिंदगी का आधार बनी है।



