₹3,586 करोड़ की कटौती और वेतन स्थगन से टूटा कर्मचारियों का मनोबल – कांग्रेस सरकार की आर्थिक विफलता उजागर : विपिन परमार
अक्स न्यूज लाइन शिमला 21 मार्च :
भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष एवं विधायक विपिन परमार ने कांग्रेस सरकार द्वारा प्रस्तुत ₹54,928 करोड़ के बजट पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बजट प्रदेश की कमजोर आर्थिक स्थिति और गलत नीतियों का स्पष्ट प्रमाण है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष के ₹58,514 करोड़ के मुकाबले इस बार बजट में ₹3,586 करोड़ की कटौती की गई है, जिससे साफ है कि सरकार विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में असमर्थ हो चुकी है।
विपिन परमार ने कहा कि सरकार द्वारा विभिन्न श्रेणियों के अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन का हिस्सा अगले 6 महीनों के लिए स्थगित करना इस बात का संकेत है कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति गंभीर संकट में है। इसके अलावा ग्रुप-ए और ग्रुप-बी अधिकारियों के वेतन का 3% हिस्सा भी स्थगित किया गया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय कर्मचारियों के मनोबल को तोड़ने वाला है और सरकार की नीतिगत विफलता का सीधा प्रमाण है।
उन्होंने विशेष रूप से आउटसोर्स कर्मचारियों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकार ने उनके लिए न्यूनतम ₹13,750 प्रतिमाह तय करने की बात तो की है, लेकिन यह राशि आज के महंगाई भरे दौर में बेहद अपर्याप्त है। आउटसोर्स कर्मचारियों को न तो नौकरी की सुरक्षा है और न ही उन्हें स्थायी कर्मचारियों जैसी सुविधाएं मिलती हैं। यह वर्ग लंबे समय से शोषण का शिकार है, लेकिन बजट में उनके लिए कोई ठोस नीति नहीं लाई गई।
विपिन परमार ने कहा कि एक ओर सरकार वेतन स्थगित कर रही है, वहीं दूसरी ओर छोटे-छोटे मानदेय बढ़ाकर जनता को भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है—जैसे आंगनबाड़ी, आशा वर्कर और अन्य वर्गों के लिए ₹500 से ₹1000 की बढ़ोतरी। उन्होंने कहा कि यह केवल दिखावटी कदम हैं, जिनसे न तो महंगाई का असर कम होगा और न ही कर्मचारियों की वास्तविक समस्याएं हल होंगी। उन्होंने कहा कि सरकार स्वयं स्वीकार कर रही है कि उस पर लगभग ₹13,000 करोड़ की देनदारियां हैं, जबकि प्रदेश पहले ही ₹45,000 करोड़ से अधिक के कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है। ऐसे में कर्मचारियों और आउटसोर्स कर्मियों पर बोझ डालना पूरी तरह अनुचित है।
भाजपा नेता ने कहा कि कर्मचारियों को समय पर वेतन, भत्ते और पेंशन मिलना चाहिए था, लेकिन सरकार उनसे ही “बलिदान” मांग रही है। उन्होंने कहा कि यह बजट कर्मचारियों, आउटसोर्स कर्मियों और आम जनता के साथ अन्याय का दस्तावेज है।
उन्होंने सरकार से सवाल किया कि क्या कर्मचारियों का वेतन स्थगित करना ही वित्तीय सुधार है? क्या आउटसोर्स कर्मचारियों को केवल न्यूनतम वेतन देकर उनका भविष्य सुरक्षित हो जाएगा? क्या सरकार अपनी आर्थिक नीतियों की विफलता स्वीकार करेगी?
विपिन परमार ने मांग की कि वेतन स्थगन का फैसला तुरंत वापस लिया जाए, आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए स्थायी नीति बनाई जाए और कर्मचारियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जाए। “यह बजट विकास का नहीं, बल्कि आर्थिक कुप्रबंधन, कर्ज और कर्मचारियों पर बोझ डालने का दस्तावेज है।”





