हिमाचल प्रदेश इतिहास का अब तक का सबसे उबाऊ, नीरस, दिशा और विजन हीन बजट : जयराम ठाकुर
जयराम ठाकुर ने कहा कि इस सरकार की वित्तीय प्रबंधन की हकीकत सामने आ चुकी है। हर बार सरकार कर्मचारियों के वेतन में किस प्रकार कमी ला सके इस दिशा मे काम करते हैं। 3 साल से व्यवस्था परिवर्तन और प्रदेश हित का नारा लगाते लगाते प्रदेश की आर्थिक स्थिति को बदतर स्थिति में पहुंचा दिया है। जो भी घोषणाएं मुख्यमंत्री ने अपने बजट भाषण में की हैं वह भी पिछली बजट घोषणाओं की तरह या तो कागजों में धूल फांकती रह जाएंगी या फिर चुनावी गारंटीयों की तरह गोलमोल करके उनके पूरे होने करने के विज्ञापन पूरे प्रदेश में लग जाएंगे और लोग दफ्तरों के चक्कर काटते रहेंगे। यह सरकार सिर्फ अपना समय काट रही है। क्योंकि इस समय सरकार के पास करने को कुछ है नहीं और मुख्यमंत्री को अच्छे से पता है कि चुनाव के बाद हिमाचल से कांग्रेस इस तरह गायब हो जाएगी जैसे पूरे देश से गायब हो गई है। इसलिए इस तरीके के हथकंडे अपना कर अपनी लायबिलिटीज टाल रही है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि पिछली बार के बजट अनुमानों में जिस प्रकार से असमानता थी वह सप्लीमेंट्री बजट में सामने आई। कंट्री कन्यादान योजना का 10% हिस्सा भी आवंटित बजट का खर्चकर पाए। इसी तरीके से शगुन योजना का मात्र 17% हिस्सा तथा महिला सम्मान निधि का 3.7% फीफा वित्तीय वर्ष के तीन तिमाहियों में खर्च हो पाया। इसी प्रकार से उनकी ऑर्गेनिक फार्मिंग की योजना भी सिर्फ विज्ञापनों तक सीमित होकर रह गई। क्योंकि कल 1643 किसानों से ही सरकार द्वारा दो 2.69 करोड़ रुपए की खरीदारी हो पाई। इस योजना के लाभार्थियों को प्रति किसान 14000 रुपए भी नहीं मिले। जबकि इन योजनाओं पर प्रदेश सरकार द्वारा सैकड़ों करोड़ों रुपए खर्च किए गए। प्रदेश के कोने-कोने में बैनर, पोस्टर और होर्डिंग्स लगाए गए अखबारों और सोशल मीडिया पर विज्ञापन दिए गए। जयराम ठाकुर ने कहा यह बजट पूर्णतया दिशाहीन और दूरदर्शिताहीन बजट है जिसमें प्रदेश के लिए कुछ भी नहीं हैं। 29 साल के अपने राजनीतिक कार्यकाल में मैंने ऐसा दिशाहीन बजट नहीं देखा।





