पंचायत चुनाव को लेकर प्रदेश को बार-बार क्यों गुमराह कर रहे हैं मुख्यमंत्री : जयराम ठाकुर
पूरे देश में लोकतंत्र और संविधान की दुहाई देने वाली कांग्रेस पार्टी की सरकार लोकतंत्र और संविधान की धज्जियां उड़ा रही है और महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज सपनों को कुचल रही है। सरकार पंचायत चुनावों को इतने हल्के में क्यों ले रही है, यह समझ नहीं आ रहा है। एक तरफ सरकार केंद्र द्वारा सहयोग न किए जाने का रोना रोती है और दूसरी तरफ केंद्र द्वारा दिए जा रहे भरपूर सहयोग को प्राप्त करने के रास्ते बंद कर रही। यदि लोगों द्वारा निर्वाचित स्थानीय निकाय नहीं होगा तो उसका विकास कैसे होगा? केंद्र द्वारा चलाई जा रही है सैकड़ों योजनाओं का क्रियान्वयन कैसे किया जाएगा? बिना निर्वाचित प्रतिनिधियों के केंद्र की योजनाएं जमीन पर कैसे पहुंचेंगी क्योंकि ज्यादातर योजना में निर्वाचित स्थानीय निकायों का होना बहुत जरूरी है। यदि सरकार इन चुनाव को साल यह 6 महीने और खींच लेगी तो प्रदेश को केंद्र द्वारा दी जा रही तमाम योजनाओं के पैसे नहीं मिलेंगे या देर से मिलेंगे। इस नुकसान की भरपाई कैसे होगी। 16वें वित्त आयोग में देश भर के शहरी और ग्रामीण निकायों हेतु जो लगभग 8 लाख करोड़ रुपए की धनराशि का प्रावधान किया गया है बिना निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के इसका लाभ कैसे मिलेगा? चुनाव के बिना स्थानीय निकायों का विकास रुक जाएगा। सरकार किसी नाकामी की वजह से मनरेगा प्रदेश में मनरेगा के 1.72 लाख प्रोजेक्ट अटके पड़े हैं और 655 पंचायतों में मनरेगा के तहत एक भी व्यक्ति को एक दिन का भी रोजगार नहीं मिला है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि 9 जनवरी को माननीय उच्च न्यायालय ने 30 अप्रैल तक चुनाव संपन्न करवाने के आदेश दिए थे। तब से सरकार चुनाव करवाने के बजाय चुनाव न करवाने की रणनीति पर काम कर र हीथी। बार-बार डेडलाइन खत्म होने के बाद भी निर्वाचन सूची का प्रकाशन नहीं कर रही थी। साथ ही साथ प्रदेश को गुमराह भी कर रही थी। मुख्यमंत्री ने अपनी मंशा तो न्यायालय के आदेश पर सवालिया निशान लगाते हुए की हुई टिप्पणी से पहले ही जाहिर कर दी थी। सरकार पंचायत चुनाव करवाने में होने वाले खर्च पर दुहाई देती है लेकिन चुनाव न करवाने के लिए मुकदमे लड़ने पर करोड़ों रुपए खर्च करती है। सरकार आपदा प्रबंधन कानून थोप कर प्रदेश में चुनाव रोकना चाहती है लेकिन सबसे ज्यादा आपदा प्रभावित क्षेत्र में जाकर अपने 3 साल का जश्न मनाने के लिए आपदा राहत के लिए केंद्र सरकार द्वारा भेजे गए करोड़ों रुपए खर्च करती है। सरकार आपदा से हुए नुकसान के नाम पर पंचायत चुनाव रोकने की पैरवी भी करती है लेकिन आपदा प्रभावित क्षेत्रों में क्षतिग्रस्त सुविधाओं को बहाल करने के लिए कोई कदम नहीं उठाती है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को यह बताना चाहिए कि आपदा प्रबंधन कानून लागू होने के बाद उन्होंने प्रदेश की आपदा राहत क्षेत्र में आपदा राहत की समीक्षा करने के लिए कितने दौरे किए हैं?





