एचआईवी-एड्स से ग्रस्त लोगों और उनके आश्रितों तक पहुंचाएं योजनाएं

एचआईवी-एड्स से ग्रस्त लोगों और उनके आश्रितों तक पहुंचाएं योजनाएं
Ad 1 Ad 2 Ad 3 Ad 4 Ad 5 Ad 6 Ad 7 Ad 8 Ad 9
Ad 1 Ad 2 Ad 3 Ad 4 Ad 5 Ad 6 Ad 7 Ad 8 Ad 9
Ad 1 Ad 2 Ad 3 Ad 4 Ad 5 Ad 6 Ad 7 Ad 8 Ad 9
अक्स न्यूज लाइन हमीरपुर 23 मार्च : 
उपायुक्त गंधर्वा राठौड़ ने स्वास्थ्य विभाग और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे जिला में एचआईवी-एड्स से ग्रस्त लोगों को एआरटी सेंटर के माध्यम से सभी आवश्यक दवाइयों की आपूर्ति नियमित रूप से सुनिश्चित करने के साथ-साथ इन लोगों तथा इनके आश्रितों को सरकार की ओर से चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से भी लाभान्वित करें। इन लोगों के साथ किसी भी तरह के भेदभाव को रोकने के लिए बनाए गए विभिन्न अधिनियमों एवं नियमों की भी अक्षरशः अनुपालना होनी चाहिए तथा किसी भी स्तर पर इनकी पहचान उजागर नहीं होनी चाहिए।

 एचआईवी-एड्स से ग्रस्त लोगों से संबंधित विभिन्न योजनाओं की समीक्षा के लिए सोमवार को यहां हमीर भवन में आयोजित वार्षिक बैठक की अध्यक्षता करते हुए उपायुक्त ने ये निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन लोगों को दवाइयां और अन्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए मेडिकल कालेज अस्पताल हमीरपुर में एआरटी सेंटर स्थापित किया गया है। इसमें जिला हमीरपुर और इसके साथ लगते जिला बिलासपुर, मंडी, ऊना तथा कांगड़ा जिले के कुछ इलाकों के कुल 1453 एचआईवी संक्रमित एवं एड्स के रोगियों को दवाइयां उपलब्ध करवाई जा रही हैं। इनमें जिला हमीरपुर के संक्रमित रोगियों की संख्या 953 है।

 उपायुक्त ने कहा कि बचाव एवं जागरुकता ही एड्स का इलाज है। इसके प्रति आम लोेग, विशेषकर युवा जागरुक रहें तो इसे फैलने से रोका जा सकता है। एचआईवी संक्रमित महिला के गर्भधारण के 24 सप्ताह के भीतर अगर पता चल जाए तो बच्चे को संक्रमण से बचाया जा सकता है। इसलिए, सरकार ने सभी गर्भवती महिलाओं का एचआईवी टैस्ट अनिवार्य कर दिया है और अगर गर्भवती महिला एचआईवी संक्रमित पाई जाती है तो उसे तुरंत दवाइयां शुरू कर दी जाती हैं, जिससे बच्चे का बचाव हो जाता है। संक्रमित व्यक्ति अगर अपनी जीवन शैली को ठीक रखे तथा एआरटी सेंटर से नियमित रूप से दवाइयां एवं डॉक्टरी सलाह लेता रहे तो वह भी लंबा जीवन जी सकता है।

 उपायुक्त ने कहा कि एचआईवी-एड्स के बारे में अभी भी समाज में कई भ्रांतियां हैं और इसका पता चलने पर रोगियों के साथ भेदभाव की आशंका रहती है। इसलिए, स्वास्थ्य विभाग और अन्य संबंधित विभाग फील्ड में लगातार जागरुकता कार्यक्रम आयोजित करें। शिक्षण संस्थानों में गठित रैड रिबन क्लबों को भी सक्रिय रखें।

 उपायुक्त ने बताया कि एचआईवी-एड्स के रोगियों और उनके आश्रितों को वित्तीय मदद, परिवहन, शिक्षण-प्रशिक्षण, रोजगार और अन्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए विभिन्न विभागों की जिम्मेदारी तय की गई है। सभी संबंधित विभाग पात्र लोगों को लाभान्वित करें।  बैठक में सीएमओ डॉ. प्रवीण चौधरी, मेडिकल कालेज अस्पताल के एमएस डॉ. देशराज शर्मा और जिला एड्स नियंत्रण अधिकारी सुनील वर्मा ने विभिन्न योजनाओं एवं सुविधाओं विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया।