नाहन: सिरमौर के 106 जमा दो स्कूलों में नियमित प्रिंसिपल नही सीनियर प्रवक्ता देख रहे हैं कामकाज....मिनिस्ट्रियल स्टाफ़ के भी लाले..

नाहन: सिरमौर के 106 जमा दो स्कूलों में नियमित प्रिंसिपल नही सीनियर प्रवक्ता देख रहे हैं कामकाज....मिनिस्ट्रियल स्टाफ़ के भी लाले..

अक्स न्यूज लाइन नाहन 04 फरवरी :

स्कूली नोनिहलों को गुणात्मक शिक्षा देने वायदे अक्सर सभी सरकारें करती आई है। लेकिन यह तभी सम्भव होगा जब स्कूलों में माकूल आधारभूत ढांचा व स्टाफ मिलेगा।

यहां जमा दो स्कूलों को लेकर चर्चा हो रही है। इस मामले जिला सिरमौर के जमा दो स्कूलों की सरकारी अनदेखी किसी से छिपी नहीं है। जिले के 185 जमा दो स्कूलों में से 106 स्कुल बिना नियमित प्रिंसिपल के चल रहे है। इन स्कूलों का जिम्मा इन स्कूलों में तैनात सीनियर प्रवक्ताओं के हवाले किया गया है।

आलम यह है कि इस स्कूलों में सरकार ने मिनिस्ट्रिलय स्टाफ तक तैनात नही कर रखा है स्कुल ऑफिस के तमाम कार्य इन स्कूलों में  प्रवक्ताओं को करने पड़ रहे है।

एक तरफ सरकार कहती है किस्कूलों में शैक्षणिक माहौल तैयार करना व बहेतर नतीजे लाना।शिक्षकों की जिम्मेदारी है। लेकिन इन स्कूलों में शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यो में झोंक दिया गया है तो फिर बेहतर नतीजों की उम्मीद  किस आधार पर की जा सकती है जब स्कूलों में प्रवक्ताओं पर गैर शैक्षणिक कार्यो का दबाव लगातार बढ़ रहा हो।

कई स्कूलों में अनुभव की कमी के कारण फैसले लेने में देरी हो रही है,सरकारी निर्देशों वाले पत्रों की अलग अलग व्याख्याएं करने से भी कामकाज में मुश्किलें होती है। शायद इसका अंदाजा सरकार में बैठी अफसरशाही को नही है।

 पढ़ाई के इलावा ऑनलाइन सिस्टम भी इन स्कूलों में जी का जंजाल बना है सरकारी स्कूलों में जहां क्लेरिकल स्टाफ नहीं है वहां इन प्रवक्ताओं को सारा दिन विभाग से ऑनलाइन रिपोर्ट मांगी जा रही है और आदेश है कि स्कूलों में मोबाइल नही चला सकते। बहुत से स्कूलों में सिग्नल की समस्याएं हैं लगे रहो अपलोड करने में समय की बरबादी हो रही है।

हिमाचल प्रदेश स्कुल प्रवक्ता संघ के  राज्य संरक्षक सुरेंद्र पुंडीर कहा कि जिला सिरमौर के 185 जमा दो स्कूलों में से 106 स्कूलों में नियमित रूप से प्रिंसिपल नहीं है। ऐसे सभी स्कुल वहां के सीनियर प्रवक्ता के हवाले किए गए है। इन स्कूलों में क्लेरिकल स्टाफ भी सरकार ने नही दिया है।

: ऐसे सारा काम प्रवक्ताओं को करना पड़ रहा है। फैसले लेने में देरी हो रही है। प्रवक्ता ज्यादा समय इन कामों में उलझे रहते हैं ऐसे शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहे हैं।: सरकार को इन स्कूलों में नियमित प्रिंसीपल व क्लेरिकल स्टाफ भेजना  चाहिए।