मुख्यमंत्री की झूठी घोषणाओं पर अब कोई विश्वास नहीं करता, पिछले वादों का हिसाब दें : जयराम ठाकुर
प्रथम और द्वितीय श्रेणी के कर्मचारियों की वेतन कटौती के फैसले को वापस लेने के सवाल पर उन्होंने कहा कि हम पहले दिन से कह रहे थे कि यह फैसला न तो सही है और न ही कानून सम्मत है। बागी विधायकों की पेंशन वापस लेने का फैसला भी सही नहीं था। हमारे मना करने के बावजूद यह कानून पारित किया गया, जिसे हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया। आखिर इस पूरे प्रकरण में बदनामी किसकी हुई? गरिमा किसकी गिरी? माननीय सदन और सरकार की। लेकिन सरकार को इन बातों की कोई परवाह नहीं है। जो मन में आता है, वही किया जा रहा है, चाहे परिणाम कुछ भी हों।
उन्होंने कहा कि चुनावों में भी इसी तरह मनमानी की जा रही है और अदालत से फटकार मिल रही है। बिना सोचे-समझे, बिना नियम-कानून के फैसले लिए जा रहे हैं, जिससे हर दिन सरकार की किरकिरी हो रही है। व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर पूरी व्यवस्था का मजाक बना दिया गया है।
पत्रकारों के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सरकाघाट में बिटिया के हत्याकांड पर सरकार ने संवेदनहीनता दिखाई है और अब मुख्यमंत्री व उनकी टीम चाहती है कि विपक्ष इस पर आवाज भी न उठाए। हमें क्या बोलना है और क्या नहीं, यह मुख्यमंत्री तय नहीं कर सकते। उन्हें अपना काम करना चाहिए। प्रदेश में माफिया बेखौफ घूम रहा है, दिनदहाड़े गोलियां चल रही हैं, बेटियों का स्कूल जाना मुश्किल हो गया है, और सरकार हमें ही ज्ञान दे रही है।








