हरोली के तीन क्लस्टर देश के 38 पायलट क्लस्टरों में शामिल, 97 करोड़ की योजना से बदलेगी सिंचाई व्यवस्था
अक्स न्यूज लाइन ऊना, 20 जून :
हर बूंद का सदुपयोग और हर खेत तक पर्याप्त पानी पहुंचाने के संकल्प के साथ हरोली ब्लॉक के पालकवाह में शनिवार को 'समृद्धि की पाठशाला' कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कमांड एरिया डेवलपमेंट एंड वाटर मैनेजमेंट (एम-सीएडीडब्ल्यूएम) योजना के तहत जल प्रबंधन, आधुनिक सिंचाई प्रणाली और किसानों की भागीदारी को लेकर व्यापक मंथन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता उपायुक्त ऊना जतिन लाल ने की, जबकि केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की संयुक्त आयुक्त डॉ. एम्बिली जी.के. विशेष रूप से उपस्थित रहीं। उनके साथ सोशल एक्सपर्ट हेमलता, एनीटो फ्रांसिन शोभित तथा अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
उपायुक्त जतिन लाल ने कहा कि जल संरक्षण और पानी का विवेकपूर्ण उपयोग आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि 97.05 करोड़ रुपये की यह महत्वाकांक्षी योजना हरोली के कृषि परिदृश्य में ऐतिहासिक बदलाव लाएगी। उन्होंने किसानों से योजना का अधिकतम लाभ उठाने और हरोली को देश के लिए जल प्रबंधन का एक आदर्श मॉडल बनाने का आह्वान किया।
उन्होंने बताया कि हरोली ब्लॉक के टाहलीवाल, हरोली और खड्ड क्लस्टरों के कुल 4,889 हेक्टेयर कमांड क्षेत्र को इस योजना के तहत सुनिश्चित सिंचाई सुविधा मिलेगी, जिससे लगभग 6,240 किसान परिवार लाभान्वित होंगे। 62 राजस्व गांवों को कवर करने वाली इस परियोजना को प्रशासनिक एवं व्यय स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। इसके तहत कुल 131 सिंचाई योजनाओं का आधुनिकीकरण किया जाएगा, जिनमें 26 नई तथा 105 मौजूदा योजनाओं का विकास एवं जीर्णोद्धार शामिल है।
योजना के अंतर्गत लगभग 335 किलोमीटर लंबा दाबयुक्त पाइप वितरण तंत्र, भंडारण संरचनाएं, एससीएडीए और आईओटी आधारित निगरानी एवं नियंत्रण प्रणाली तथा ऊर्जा दक्ष एवं सौर ऊर्जा आधारित पंपिंग व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। इससे किसानों की वर्षा पर निर्भरता कम होगी, जल उपयोग दक्षता बढ़ेगी और कृषि उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की संयुक्त आयुक्त डॉ. एम्बिली जी.के. ने बताया कि एम-सीएडीडब्ल्यूएम योजना देशभर के 38 क्लस्टरों में पायलट परियोजना के रूप में लागू की जा रही है, जिनमें हरोली के तीन क्लस्टर भी शामिल हैं। उन्होंने योजना की सफलता के लिए किसानों की सक्रिय भागीदारी पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि योजना के तहत अगले पांच वर्षों तक किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और हर प्रकार का आवश्यक समर्थन प्रदान किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि पाइप आधारित सिंचाई प्रणाली के माध्यम से समान दबाव के साथ पानी अंतिम खेत तक पहुंचेगा और जल की बर्बादी में कमी आएगी। पानी का आकलन घंटों के बजाय लीटर में किया जाएगा तथा पूरी व्यवस्था ऑनलाइन ट्रैक होगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और विवाद कम होंगे। योजना के तहत वाटर यूजर सोसायटी को 50 लाख रुपये तक की सहायता का भी प्रावधान किया गया है। उन्होंने हरोली में जल प्रबंधन में महिलाओं की सक्रिय एवं सराहनीय भागीदारी की भी प्रशंसा की।
डॉ. एम्बिली ने बताया कि नई व्यवस्था से कृषि उत्पादन में 15 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि, वर्ष में दो से तीन फसलें लेने की संभावना तथा डीजल और पानी की बचत से प्रति किसान 5,000 से 10,000 रुपये तक लागत में कमी आ सकती है। साथ ही सब्जियों, फलों और अन्य नकदी फसलों को बढ़ावा मिलने से किसानों की आय में 25 से 50 प्रतिशत तक वृद्धि की संभावना है।
कार्यक्रम में केंद्रीय जल आयोग, शिमला के उपनिदेशक सुमित गुप्ता ने कुशल जल प्रबंधन, आधुनिक सिंचाई पद्धतियों तथा खेत स्तर पर योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से संबंधित तकनीकी जानकारी साझा की। मुख्यालय शिमला से जल शक्ति विभाग के अधीक्षण अभियंता मनदीप गुप्ता ने कहा कि हरोली का यह पायलट प्रोजेक्ट अन्य जिलों के लिए भी एक आदर्श मॉडल बन सकता है। उन्होंने कहा कि योजना की सफलता के लिए जनभागीदारी और प्रशासन के समन्वित प्रयास आवश्यक हैं।
भारत सरकार के परामर्शदाता प्रमोद वैद्य ने क्लस्टर स्तरीय गतिविधियों की प्रगति और कार्यान्वयन ढांचे की जानकारी दी। सोशल एक्सपर्ट हेमलता ने पावर प्वाइंट प्रस्तुति के माध्यम से योजना की विस्तृत जानकारी दी, जबकि कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. संजय शर्मा ने कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाली वैकल्पिक फसलों और फसल विविधीकरण अपनाने की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला।
किसानों ने उपमुख्यमंत्री का जताया आभार
खुले सत्र में किसानों ने विभिन्न प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। किसानों ने एक स्वर में उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के प्रयासों के लिए आभार प्रकट करते हुए कहा कि श्री अग्निहोत्री के प्रयासों से हरोली क्षेत्र में सिंचाई के क्षेत्र में बड़ा परिवर्तन आया है और नई योजना से कृषि क्षेत्र को और अधिक मजबूती मिलेगी। 'अब पानी खेत ढूंढेगा, किसान नहीं' और 'हर बूंद का सही उपयोग, हर खेत तक सही पानी' के संदेश के साथ 'समृद्धि की पाठशाला' कार्यक्रम का समापन हुआ।
इस अवसर पर जल शक्ति विभाग के मुख्य अभियंता रोहित दुबे, अधीक्षण अभियंता नरेश धीमान, अधिशाषी अभियंता पुनीत शर्मा, उपनिदेशक बागवानी डॉ. के.के. भारद्वाज, उपनिदेशक कृषि डॉ. प्रेम ठाकुर सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, वाटर यूजर सोसायटी के सदस्य तथा बड़ी संख्या में क्षेत्र के किसान उपस्थित रहे।
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