हिमाचल के पत्रकारों ने जाने जारवा आदिवासियों के संरक्षण के प्रयास

हिमाचल के पत्रकारों ने जाने जारवा आदिवासियों के संरक्षण के प्रयास

अक्स न्यूज लाइन शिमला 27 फरवरी : 


अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की यात्रा पर आए हिमाचल प्रदेश के पत्रकारों के दल ने जारवा आदिवासियों के संरक्षण एवं बेहतरी के लिए केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी हासिल की।

मीडिया दल ने जारवा संरक्षित क्षेत्र का भ्रमण किया। दल ने बाराटांग वन क्षेत्र के डीएफओ श्री राजी जॉर्ज से संरक्षित वन क्षेत्र पर विस्तार से बातचीत की। इस दौरान असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट श्री राजकुमार कोट्टैयार भी मौजूद थे।

जारवा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के मूल निवासी हैं, जो हजारों वर्षों से यहां के जंगलों में पारंपरिक जीवन जी रहे हैं। जारवा आदिवासी बाहरी दुनिया से बहुत कम संपर्क रखते हैं और मुख्य रूप से  शिकार, मछली पकड़ने  और शहद इकट्ठा करने पर निर्भर हैं। भारत सरकार ने इनकी सुरक्षा के लिए उनके निवास क्षेत्र को एक संरक्षित क्षेत्र  घोषित किया है और उनसे संपर्क करना या उनकी तस्वीरें लेना कानूनन अपराध है।

मीडिया कर्मियों ने बाराटांग द्वीप में लाइमस्टोन केव्स भी देखीं। कुदरती रूप से निर्मित ये गुफाएँ अपनी अनोखी जियोलॉजिकल बनावट के लिए मशहूर हैं। इसतरह की गुफाएं हिमाचल में भी मौजूद हैं।

हिमाचल प्रदेश के पत्रकारों के इस दल को अंडमान के अनोखे मैंग्रोव वन क्षेत्र देखने का भी अवसर मिला ।  ये वन प्राकृतिक आपदाओं जैसे सुनामी, चक्रवात से तटीय सुरक्षा करते हैं और जैव विविधता का केंद्र हैं।

मीडिया दल ने बाराटांग द्वीप पर मड वॉल्कानो यानि मिट्टी वाला ज्वालामुखी को भी देखा। मिट्टी के ये ज्वालामुखी न केवल सक्रिय हैं बल्कि अनोखे भी हैं। इनसे मिट्टी, गैस और पानी निकलता है। यात्रा के अगले चरण में मीडिया टीम स्वराज द्वीप (पहले हैवलॉक) जाएगी।