राज्यपाल ने शिमला ज़िले के मेधावियों को किया सम्मानित औषधीय पौधों के वैज्ञानिक उपयोग से हिमाचल में हरित उद्यम राजधानी बनने की क्षमताः राज्यपाल
अक्स न्यूज लाइन शिमला 15 जुलाई :
राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि प्रतिष्ठित सेवाओं में चयनित होने का लक्ष्य निर्धारित करना सराहनीय है, लेकिन सफलता केवल एक करियर की उपलब्धि तक सीमित नहीं है। उन्होंने युवाओं को नवाचार, उद्यमिता और वैज्ञानिक अनुसंधान, विशेषकर औषधीय पौधों एवं प्राकृतिक संसाधनों के क्षेत्र में उपलब्ध विविध अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया क्योंकि हिमाचल प्रदेश में इन क्षेत्रों में अपार संभावनाएं मौजूद हैं।
राज्यपाल आज हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला में एक प्रमुख हिंदी दैनिक समाचार समूह द्वारा आयोजित ‘शिमला के मेधावी’ कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने शिमला जिले के 35 से अधिक विद्यालयों के लगभग 600 मेधावियों को उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया।
श्री गुप्ता ने कहा कि न्यूज़ीलैंड ने वैश्विक बाजार की मांग के अनुरूप मनुका पौधे का बाजार विकसित किया है, दक्षिण कोरिया ने जिनसेंग को एक महत्वपूर्ण आर्थिक संसाधन में परिवर्तित किया है, जबकि लैवेंडर की खेती से जम्मू-कश्मीर के लोगों के जीवन में उल्लेखनीय सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन आया है। हिमाचल प्रदेश में औषधीय जड़ी-बूटियों, सुगंधित पौधों तथा अन्य उच्च मूल्य वाली फसलों का समृद्ध भंडार है। वैज्ञानिक खेती, मूल्य संवर्धन और नवाचार के माध्यम से इस भंडार का सर्वोत्तम उपयोग कर हजारों युवाओं के लिए सतत् आजीविका के अवसर सृजित किए जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि यदि हमारे युवा नवाचार को प्रदेश के समृद्ध प्राकृतिक संसाधनों के साथ जोड़ें, तो हिमाचल प्रदेश भारत के बागवानी केन्द्र के साथ-साथ हरित उद्यमिता की राजधानी के रूप में भी उभर सकता है।
शिक्षा के महत्व को इंगित करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल परीक्षाओं में अच्छे अंक प्राप्त करने तक सीमित नहीं है बल्कि यह चरित्र निर्माण, नवाचार को बढ़ावा देने और युवाओं को समाज तथा राष्ट्र निर्माण में सार्थक योगदान देने के लिए सक्षम बनाने का माध्यम है। उन्होंने मेधावियों को देश के स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों के अनुरूप सशक्त, प्रगतिशील और नैतिक मूल्य आधारित भारत का प्रतिनिधि बताया।
राज्यपाल ने कहा कि विद्यार्थियों की उपलब्धियां उनकी कड़ी मेहनत, दृढ़ संकल्प और ज्ञान प्राप्त करने की अटूट जिज्ञासा का प्रत्यक्ष परिणाम हैं। उन्होंने विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ-साथ सह-पाठ्यक्रम एवं अन्य गतिविधियों में उनकी उत्कृष्टता की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि वास्तविक शिक्षा केवल पाठ्य पुस्तकों तक सीमित नहीं होती।
राज्यपाल ने विद्यार्थियों से नशे की बुराई के प्रति सचेत रहने का आह्वान करते हुए कहा कि मादक पदार्थों का दुरुपयोग समाज के लिए एक बड़े खतरे के रूप में उभर रहा है। उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहने तथा अपने मित्रों और सहपाठियों को भी इसके प्रति जागरूक करने की अपील की। उन्होंने कहा कि नशामुक्त हिमाचल ही सशक्त और समृद्ध हिमाचल की आधारशिला है।
इस अवसर पर राज्यपाल ने विद्यापीठ संस्थान द्वारा शुरू की गई ‘कलम ऑफ हिमाचल’ पहल का भी शुभारंभ किया।
इससे पूर्व आयोजनकर्ता समाचार पत्र समूह के राज्य ब्यूरो प्रमुख राजेश मंढोतरा ने राज्यपाल का स्वागत किया तथा कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की।
राज्यपाल का स्वागत करते हुए हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने कहा कि कठिन परिश्रम ही सफलता की कुंजी है और विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों का आत्मविश्वास के साथ सामना करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने शिक्षा के क्षेत्र में नई संभावनाएं और अवसर प्रदान किए हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय में स्थापित किए गए पांच नए शैक्षणिक केन्द्रों तथा परिसर में प्रस्तावित सौर पैनल निर्माण इकाई की जानकारी देते हुए कहा कि इन पहलों से विद्यार्थियों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया जा रहा है।
विद्यापीठ संस्थान के निदेशक रमेश शर्मा ने राज्यपाल का स्वागत किया। निदेशक रविन्द्र अवस्थी ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव संदीप भारद्वाज, अभिभावक, शिक्षक, विश्वविद्यालय के प्राध्यापक तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।
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