अक्स न्यूज लाइन शिमला 28 नवंबर :
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के शताब्दी वर्ष के पावन अवसर पर समाजजीवन के विविध आयामों को समर्पित हिंदू सम्मेलन श्रृंखला के अंतर्गत केशव नगर इकाई द्वारा आयोजित भव्य सम्मेलन आज शिमला के वाइब्रेशन हॉल में अत्यंत उत्साह एवं गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राजीव सूद, जिला कार्यवाह हरीश, एवं सम्मेलन के उपाध्यक्ष राजिंदर दत्त उपस्थित रहे। कार्यक्रम में डॉ. परमजीत कौर विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुईं। सभी विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति ने सम्मेलन को ऊर्जा और प्रेरणा से भर दिया।
वक्ताओं ने अपने उद्बोधनों में संघ के शताब्दी वर्ष को संकल्प वर्ष बताते हुए कहा कि यह केवल उत्सव का समय नहीं, बल्कि समाज को संगठित करने, सांस्कृतिक चेतना को जागृत करने और राष्ट्रनिर्माण में हर व्यक्ति की सक्रिय भूमिका सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण अवसर है।
उन्होंने कहा कि आने वाला समय समाजहित, संस्कृतिरक्षा और राष्ट्रोन्नति के कार्यों को और अधिक गति देने का है। सम्मेलन में उपस्थित विविध क्षेत्रों के स्वयंसेवकों, नागरिकों और प्रबुद्धजनों ने एक स्वर में इन उद्देश्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
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राजीव सूद का उद्बोधन — धर्म-सुरक्षा, सामाजिक जागरूकता और आंतरिक आत्मचिंतन पर विशेष जोर
अपने विस्तृत संबोधन में राजीव सूद ने कहा— “चाली है सनातन धर्म का भविष्य—शुद्धता भी, सरलता भी; पवित्रता भी, प्रासंगिकता भी।”
उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत सहअस्तित्व और साझेपन की भावना पर आधारित है। हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन और अन्य समुदायों द्वारा एक-दूसरे के त्योहार मनाने की परंपरा हमारी सांझी संस्कृति की जीवंत पहचान है।
उन्होंने कहा— “भारत हजारों वर्षों तक बल प्रयोग से नहीं, बल्कि साझेपन से टिका है।”
सूद ने समाज के सामने खड़ी एक गंभीर चुनौती—धर्मांतरण—को भी स्पष्ट शब्दों में रखा। उन्होंने कहा कि अधिकांश धर्मांतरण विचारधारा नहीं, बल्कि उपेक्षा, सामाजिक अलगाव, सहयोग की कमी, लालच और सुविधा के कारण होते हैं। यह केवल सरकार की नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक और नैतिक जिम्मेदारी है कि कोई भी हिंदू अपने समाज में असहाय, अकेला या उपेक्षित महसूस न करे।
उन्होंने कहा “धर्म तब कमजोर नहीं होता जब कोई हमला करता है; धर्म तब कमजोर होता है जब हम अपने लोगों की देखभाल नहीं करते।”