विधानसभा को अपनी जनसभा का मंच समझ कर बयानबाजी करने आते है मंत्री जगत नेगी : बलदेव तोमर

विधानसभा को अपनी जनसभा का मंच समझ कर बयानबाजी करने आते है मंत्री जगत नेगी  : बलदेव तोमर

अक्स न्यूज लाइन नाहन 28 नवंबर  : 
राजस्व मंत्री जगत नेगी, जो कांग्रेस सरकार में मंत्री हैं, आज फिर सदन की गरिमा भूलकर ऐसी टिप्पणियाँ लेकर आए मानो वे विधानसभा में नहीं बल्कि किसी बौखलाए हुए कांग्रेस मंच पर खड़े हों। सदन वह स्थान है जहां विकास, नीतियों और जनता के हितों पर चर्चा होती है—लेकिन कांग्रेस के मंत्री इसे बार-बार अपनी हताशा और खोखली बयानबाज़ी का मंच बना रहे हैं।


भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस मंत्री जगत नेगी जिस भाषा और अंदाज़ में वक्तव्य दे रहे हैं, वह स्पष्ट दिखाता है कि वे सदन को उकसावे वाला राजनीतिक मंच बनाने पर तुले हुए हैं। विपक्ष को इस बात के लिए कोई मजबूर नहीं कर सकता कि वह सदन में देशविरोधी, समाजविरोधी और वैमनस्य फैलाने वाली कांग्रेस की भाषा को सुनने के लिए बाध्य हो।


बलदेव तोमर ने कहा कि आज उन्होंने आरएसएस को कटघरे में खड़ा करने की जो नाकाम कोशिश की, वह कांग्रेस की वैचारिक दिवालियापन और मानसिक हताशा का सबसे बड़ा उदाहरण है। करोड़ों लोग स्वेच्छा से RSS से जुड़ते हैं, लेकिन कांग्रेस को राष्ट्रसेवा और अनुशासन की यह संस्कृति हमेशा से चुभती है। कांग्रेस के मंत्री यह मानसिक कुंठा अब सदन में उगलने लगे हैं।

जगत नेगी के ऐसे अनर्गल बयानों की असल वजह है कांग्रेस की प्रदेश और पूरे देश में लगातार गिरती हालत। अभी-बिलकुल ताज़ा चोट इन्हें बिहार चुनाव से लगी है, जहां कांग्रेस केवल गिने-चुने विधायकों तक सिमट कर रह गई है। यह राष्ट्रीय स्तर पर हो रही लगातार पराजयों का आक्रोश है, जो अब ये मंत्री हिमाचल के सदन में निकाल रहे हैं। राजनीतिक पराजय का दर्द कांग्रेस मंत्रियों की भाषा में साफ झलक रहा है।


तोमर ने कहा कि मंडी में हुए जबरदस्त विरोध ने मंत्री को और असुरक्षित बना दिया है। जनता की नाराजगी से उत्पन्न दबाव ही उनकी बेतुकी बयानबाज़ी का कारण है। सदन जैसे पवित्र स्थान में अपनी व्यक्तिगत पीड़ा उड़ेलने का प्रयास कांग्रेस की विफलता और मंत्री की कमजोरी का प्रतीक है।


बलदेव तोमर ने कहा कि यह कांग्रेस मंत्री कभी राष्ट्र की एकता पर प्रश्न खड़े करते हैं, कभी सेना की निष्ठा पर, और कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी पर आधारहीन आरोपों की बौछार करने लगते हैं। क्या करोड़ों देशभक्त गलत हैं और सिर्फ कांग्रेस के कुछ नेता ही सही? यह कांग्रेस की घबराई हुई सोच है, जो हर मुद्दे पर राष्ट्रीय हित पर नहीं बल्कि राजनीतिक स्वार्थ पर टिक गई है।