प्राकृतिक खेती से सुदृढ़ हो रही प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था राज्य अवशेष परीक्षण प्रयोगशाला में प्राकृतिक उत्पादों की होगी गुणवत्ता जांच

प्राकृतिक खेती से सुदृढ़ हो रही प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था राज्य अवशेष परीक्षण प्रयोगशाला में प्राकृतिक उत्पादों की होगी गुणवत्ता जांच
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 अक्स न्यूज लाइन शिमला 12 जुलाई :

हिमाचल की माटी पर किसानों की समृद्धि की नई ईबारत लिखी जा रही है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने समृद्धि की इस कहानी की रूप रेखा तैयार की है। उनके दूरदर्शी नेतृत्व में कल्याणकारी नीतियों और योजनाओं से किसानों के जीवन में खुशहाली आ रही है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा प्रदान कर रही है।
हिमाचल प्रदेश, देश का पहला राज्य है, जिसने प्राकृतिक खेती से तैयार की गई फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रदान किया है। वर्ष-दर-वर्ष इसमें उल्लेखनीय वृद्धि भी की जा रही है। अब प्राकृतिक खेती से तैयार किए गए गेहूं की खरीद 80 रुपये प्रति किलोग्राम, मक्की 50 रुपये प्रति किलोग्राम, कच्ची हल्दी 150 रुपये प्रति किलोग्राम, पांगी घाटी की जौ 80 रुपये प्रति किलोग्राम तथा अदरक की 30 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीद की जा रही है।
सरकार के सतत प्रयासों से किसानों का प्राकृतिक खेती के प्रति रुझान बढ़ा है। वित्त वर्ष 2024-25 में 838 किसानों से 2123.58 क्विंटल गेहूं की खरीद की तुलना में इस रबी के सीजन में प्रदेश सरकार ने 1,891 किसानों से प्राकृतिक पद्धति से उत्पादित 2,679.89 क्विंटल गेहूं की खरीद सुनिश्चित की है।
मुख्यमंत्री प्रदेश के जनजातीय क्षेत्र के गुणवत्तायुक्त एवं पोषण युक्त प्राकृतिक खाद्यान्नों को विशेष पहचान और बाजार दिलवाने के लिए ठोस प्रयास कर रहे हैं। जिला चंबा के पांगी उप-मंडल को राज्य का पहला प्राकृतिक खेती उप-मंडल घोषित किया गया है। इससे क्षेत्र के लोग अपनी पारंपरिक कृषि पद्धतियों का संरक्षण और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं। विगत खरीफ सीजन में पांगी उप-मंडल की हुडान, सुराल, किलाड़, सांच और सेचु पंचायत के किसानों ने अच्छे दाम में जौ की बिक्री सुनिश्चित की।
मुख्यमंत्री ने हाल ही में बड़ा भंगाल के प्रवास के दौरान अधिकारियों को किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए सभी सुविधाएं उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए हैं। इसके अतिरिक्त, बड़ा भंगाल क्षेत्र को प्राकृतिक खेती पंचायत और क्षेत्र में उत्पादित राजमाह के लिए जीआई टैग प्राप्त करने की दिशा में कार्य करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

वर्तमान में प्रदेश के 2,56,870 किसान 44,784.73 हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। प्रदेश सरकार की नई पहलों के बाद प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों की संख्या निरंतर बढ़ रही है। प्राकृतिक खेती से तैयार किए गए उत्पादों के बेहतर विपणन के लिए कृषि विभाग में अलग मार्केटिंग विंग स्थापित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
कृषि क्षेत्र के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिक दृष्टिकोण को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। समृद्ध किसान के लक्ष्य को हासिल करने के लिए वैज्ञानिक, अनुसंधान और व्यवहारिक प्रशिक्षण को प्रोत्साहन प्रदान किया जा रहा है। इस दिशा में किसानों के प्राकृतिक उत्पादों और बीज की जांच की सुविधा के लिए जिला हमीरपुर में 8.64 करोड़ रुपये की लागत से राज्य अवशेष परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित की गई है। इस प्रयोगशाला के स्थापित होने से कृषि उत्पादों विशेषकर प्राकृतिक उत्पादों की वैज्ञानिक जांच सुनिश्चित होगी। यह प्रयोगशाला अत्याधुनिक विश्लेषणात्मक उपकरणों से लैस है जो कृषि उत्पादों में मौजूद सूक्ष्म तत्वों का भी सटीकता से पता लगाने में सक्षम है। प्रयोगशाला में प्राकृतिक उत्पादों की गुणवत्ता और प्रमाणिकता की जांच की जाएगी।
प्रदेश में शून्य बजट प्राकृतिक खेती पद्धति को बढ़ावा दिया जा रहा है जिससे लोगों की सेहत के साथ मिट्टी की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में हिमाचल का प्राकृतिक खेती मॉडल देश के प्राकृतिक खेती मिशन में नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है।

 

 

 

कांग्रेस सरकार ने गांवों तक पहुंचाई महंगाई, अब हर घर से कचरा शुल्क वसूलेगी : संदीपनी भारद्वाज

 अक्स न्यूज लाइन शिमला 12 जुलाई :

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने पंचायतों में घरेलू एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से कचरा संग्रहण के लिए यूजर चार्ज वसूलने के निर्णय पर कांग्रेस सरकार को घेरते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश की जनता पिछले ढाई से तीन वर्षों से लगातार आर्थिक बोझ झेल रही है। कांग्रेस सरकार ने चुनाव से पहले राहत देने के बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन सत्ता में आने के बाद महंगाई और नए शुल्कों की लंबी श्रृंखला शुरू कर दी।

 

उन्होंने कहा कि अब ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक सामान्य परिवार से ₹50 प्रतिमाह, सामान्य दुकानों, ढाबों और छोटे प्रतिष्ठानों से ₹100 प्रतिमाह, बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से ₹500 प्रतिमाह तथा बैंकों, रेस्टोरेंट, मैरिज पैलेस, बड़े अस्पतालों जैसी संस्थाओं से ₹1,000 से ₹3,000 प्रतिमाह तक यूजर चार्ज वसूला जाएगा। कांग्रेस सरकार गांवों के गरीब, किसान, मजदूर और छोटे दुकानदार तक को नहीं छोड़ रही है।

 

संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आते ही प्रदेशवासियों पर आर्थिक बोझ बढ़ाने का अभियान चला रखा है। डीजल पर वैट बढ़ाया, बिजली उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त शुल्क और विभिन्न सरचार्ज लगाए, पानी की दरों में वृद्धि की, रजिस्ट्री एवं अन्य सरकारी सेवाओं के शुल्क बढ़ाए, और अब कचरा संग्रहण के नाम पर नया यूजर चार्ज लगा दिया गया है। यह सरकार विकास के बजाय केवल राजस्व जुटाने के लिए जनता की जेब पर डाका डाल रही है।

 

उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने चुनाव के समय 5 लाख रोजगार, 1 लाख सरकारी नौकरियां, महिलाओं को ₹1,500 प्रतिमाह, 300 यूनिट मुफ्त बिजली और महंगाई से राहत देने के वादे किए थे, लेकिन आज तक इनमें से अधिकांश वादे पूरे नहीं हुए। दूसरी ओर प्रदेश की जनता पर लगातार नए आर्थिक बोझ लादे जा रहे हैं।

 

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि हिमाचल प्रदेश का सार्वजनिक ऋण 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है और कांग्रेस सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन का खामियाजा अब आम जनता से नए-नए शुल्कों के रूप में वसूला जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार अपने आर्थिक कुप्रबंधन को छिपाने के लिए लोगों की जेब खाली करने पर उतर आई है।

 

संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि यदि स्वच्छता व्यवस्था को सुदृढ़ करना सरकार का उद्देश्य है तो पंचायतों को पर्याप्त अनुदान दिया जाना चाहिए। पंचायतों को संसाधन उपलब्ध कराने के बजाय आम लोगों पर मासिक शुल्क थोपना सरकार की विफलता का प्रमाण है।

 

उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार की पहचान अब केवल "महंगाई, टैक्स और नए शुल्क" तक सीमित रह गई है। प्रदेश की जनता हर दिन बढ़ते आर्थिक बोझ से परेशान है, जबकि कांग्रेस के नेता केवल बयानबाजी में व्यस्त हैं।

अंत में संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि कांग्रेस सरकार का पूरा कार्यकाल एक ही नारे में सिमट गया है—"महंगाई ही महंगाई, जनता पर बोझ... कांग्रेस के नेता मौज।" जनता इस जनविरोधी सरकार को समय आने पर लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देगी।