हिमाचल की राजनीति में नया नाम: 'पलटूराम' मुख्यमंत्री या जनभावनाओं का सम्मान-प्रोफेसर सिकंदर कुमार

हिमाचल की राजनीति में नया नाम: 'पलटूराम' मुख्यमंत्री या जनभावनाओं का सम्मान-प्रोफेसर सिकंदर कुमार
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अक्स न्यूज लाइन शिमला 24 अप्रैल : 

  हिमाचल प्रदेश भाजपा के प्रदेश महामंत्री व सांसद प्रोफेसर सिकंदर कुमार ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की सियासत में इन दिनों मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के लिए एक नया शब्द सुर्खियां बटोर रहा है— पलटू मुख्यमंत्री"। विपक्षी दलों और सोशल मीडिया पर आलोचनाओं का सामना कर रहे मुख्यमंत्री सुक्खू के कार्यकाल को अब फैसलों के 'यू-टर्न' वाली सरकार के रूप में देखा जा रहा है।


मुख्यमंत्री द्वारा लिए गए जन विरोधी फैसलों और फिर जनता के भारी विरोध के बाद उन्हें वापस लेने की प्रक्रिया ने मीडिया और राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। लोगों का तर्क है कि सरकार बिना किसी ठोस योजना के निर्णय लेती है और फिर फजीहत होने पर पीछे हट जाती है।


मुख्यमंत्री सुक्खू के कार्यकाल में पिछले कुछ समय में ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं, जिन्होंने उनकी कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े किए हैं समोसा विवाद और सीआईडी जांच ने सरकार की काफी किरकिरी कराई। राष्ट्रीय मीडिया में मजाक बनने के बाद सरकार को इस पर सफाई देनी पड़ी और जांच के रुख को मोड़ना पड़ा।


सुक्खू सरकार द्वारा शहरी क्षेत्रों में प्रति शौचालय 25 रुपये कर लगाने की अधिसूचना जारी की गई थी। जनता और विपक्ष के तीखे प्रहारों के बाद, सरकार ने इसे "लिपिकीय त्रुटि" बताते हुए तुरंत वापस ले लिया।  सरकार ने 125 यूनिट मुफ्त बिजली की सुविधा को चुनिंदा वर्गों के लिए बंद करने का मन बनाया था। भारी विरोध और चुनावी साख पर बन आने के कारण इस फैसले पर भी सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा।


कर्मचारियों के वेतन और पेंशन की तारीखों में बदलाव करने के निर्णय पर जब प्रदेश भर के सरकारी कर्मचारियों ने लामबंदी शुरू की, तो सरकार ने नरम रुख अपनाते हुए फिर से पुरानी व्यवस्था या राहत देने की बात कही। 


डॉ सिकंदर कुमार ने कहा कि बार-बार निर्णय बदलना मुख्यमंत्री की "कमजोर पकड़" को दर्शाता है। जहां आमजन इसे "पलटू राम" छवि कह रहा है, वहीं सरकार के करीबी इसे "संवेदनशील नेतृत्व" बता रहे हैं, जो जनता की आवाज सुनकर अपने फैसले सुधारने का साहस रखता है।


हालांकि, आम जनता के बीच यह संदेश जा रहा है कि सचिवालय में बैठे अधिकारी और सलाहकार मुख्यमंत्री को सही फीडबैक नहीं दे रहे हैं, जिसके कारण सरकार को बार-बार सार्वजनिक रूप से असहज होना पड़ रहा है। हाल ही में हिमाचल भवन दिल्ली, हिमाचल भवन चंडीगढ़, सर्किट हाउस शिमला के कमरों के रेट 4000 रूपए तक बढ़ा दिए और जब विरोध शुरू हुआ तो उस अधिसूचना को तुरंत वापिस ले लिया ! आने वाले समय में यह "यू-टर्न" वाली छवि मुख्यमंत्री सुक्खू के लिए राजनीतिक चुनौती बन सकती है।और  इसमें कोई शक नहीं कि आने वाले समय में हिमाचल प्रदेश की जनता उन्हें पलटू राम मुख्यमंत्री के रूप मे जानेगी