अक्स न्यूज लाइन शिमला 06 मई :
शिक्षा विभाग में किए जा रहे ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से सामने आने लगे हैं। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में किए गए प्रयासों का असर परीक्षा परिणामों में दिखाई दे रहा है। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थी मेहनती और प्रतिभाशाली हैं और उचित मार्गदर्शन व प्रोत्साहन मिलने पर वे उत्कृष्ट प्रदर्शन करने में सक्षम हैं। यही कारण है कि इस बार हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की 12वीं परीक्षा के नतीजों में 50 से अधिक सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी मेरिट सूची के टॉप-100 में शामिल हुए हैं यानी आधे से ज्यादा टॉपर सरकारी स्कूलों से हैं। इस वर्ष टॉप-100 में 48 छात्राओं और 10 छात्रों ने स्थान बनाया, जबकि वर्ष 2025 में यह संख्या 41 छात्राओं और 9 छात्रों की थी। वर्ष 2024 में 23 छात्राएं और 7 छात्र तथा वर्ष 2023 में 33 छात्र और 9 छात्राएं टॉप-100 में स्थान बनाने में सफल रहे थे।
सुधारों का प्रभाव पास प्रतिशतता में भी स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। इस वर्ष सरकारी स्कूलों का पास प्रतिशत 92.02 रहा। जबकि वर्ष 2025 में पास प्रतिशत 88.64, वर्ष 2024 में 73.76 प्रतिशत तथा वर्ष 2023 में 79.40 प्रतिशत रहा था। कई वर्षों के बाद इस बार 12वीं का ओवरऑल टॉपर सरकारी स्कूल से आया है। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला भवारना के छात्र अंशित कुमार ने 99.20 प्रतिशत अंक प्राप्त कर यह सिद्ध कर दिया है कि हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूल अब निजी स्कूलों से किसी भी मायने में कम नहीं हैं। अंशित की सफलता पर मुख्यमंत्री ने स्वयं उससे फोन पर बात कर बधाई दी।
इन सकारात्मक परिणामों पर मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा ‘कांग्रेस सरकार ने पहले दिन से ही व्यवस्था परिवर्तन की दिशा में कार्य किया ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। इस सफलता के पीछे विद्यार्थियों और शिक्षकों की मेहनत और अभिभावकों का सरकार के फैसलों पर विश्वास है। सुधारों के चलते हिमाचल प्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता के मामले में पांचवें स्थान पर पहुंचा है, जबकि पूर्व में भाजपा सरकार की गलत नीतियों के कारण राज्य गुणात्मक शिक्षा प्रदान करने में 21वें स्थान पर पहुंच गया था। आज प्रदेश पूर्ण साक्षर राज्य होने का गौरव भी प्राप्त कर चुका है।’
वर्तमान राज्य सरकार ने पिछले तीन वर्षों में शिक्षा और स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए कई महत्त्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। स्कूल शिक्षा के लिए 12वीं कक्षा तक अलग निदेशालय और कॉलेजों के लिए उच्च शिक्षा निदेशालय का गठन किया गया है। शिक्षकों को अंतरराष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली से अवगत करवाने के लिए विदेशों में एक्सपोजर विजिट करवाई गई हैं, वहीं मेरिट में आने वाले विद्यार्थियों को भी विदेश भ्रमण का अवसर दिया गया है, ताकि वे व्यापक दृष्टिकोण विकसित कर सकें और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें। इसके अतिरिक्त सरकारी स्कूलों में आत्मविश्वास बढ़ाने के उद्देश्य से विद्यार्थियों के लिए स्मार्ट यूनिफॉर्म चुनने की स्वतंत्रता दी गई है तथा क्लस्टर प्रणाली के माध्यम से संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया गया है।
हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के निर्देशानुसार बोर्ड की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुधार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। नई तकनीकों को अपनाते हुए विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध करवाने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे आने वाले समय में और सकारात्मक परिणाम सामने आने की उम्मीद है।