भारत सरकार ने आलू की दो नई किस्मों के लिए जारी की अधिसूचना.. हिमाचल प्रदेश के किसानों के लिए बड़ी उपलब्धि

भारत सरकार ने आलू की दो नई किस्मों के लिए जारी की अधिसूचना.. हिमाचल प्रदेश के किसानों के लिए बड़ी उपलब्धि
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अक्स न्यूज लाइन नाहन 20 जुलाई :
भारतीय कृषि एवं आलू अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के तहत भारत सरकार ने  केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला द्वारा विकसित आलू की दो उन्नत किस्मों—कुफरी अभेद्य एवं कुफरी रूबी—को खेती के लिए अधिसूचित कर दिया है।

 8 जुलाई, 2026 को भारत के राजपत्र में प्रकाशित इस अधिसूचना के बाद इन किस्मों के गुणवत्तायुक्त बीजों का उत्पादन, प्रमाणीकरण तथा बिक्री उनके अनुशंसित क्षेत्रों में की जा सकेगी। इससे देशभर में आलू उत्पादन, रोग प्रबंधन तथा किसानों के लिए बेहतर बाजार अवसर उपलब्ध होंगे।

केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. ब्रजेश सिंह ने बताया कि यह अधिसूचना हिमाचल प्रदेश के लिए विशेष महत्व रखती है, जहां आलू राज्य की प्रमुख नकदी फसलों में से एक है और हजारों पर्वतीय किसानों की आजीविका का मुख्य आधार है।

 अधिसूचित दोनों किस्मों में से कुफरी अभेद्य को विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश, पूर्वोत्तर राज्यों के पर्वतीय क्षेत्रों, तमिलनाडु के नीलगिरि क्षेत्र तथा कर्नाटक एवं महाराष्ट्र के पठारी क्षेत्रों के लिए अनुशंसित किया गया है। 

यह किस्म किसानों को अधिक उत्पादन के साथ-साथ प्रमुख रोगों से सुरक्षा प्रदान करेगी और इन क्षेत्रों में आलू उत्पादन को नई गति देगी। डॉ. ब्रजेश सिंह ने कहा कि इन दोनों किस्मों की अधिसूचना भारत की जलवायु-अनुकूल, रोग-प्रतिरोधी तथा बाजार की मांग के अनुरूप आलू की उन्नत किस्में विकसित करने की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। 

उन्होंने कहा कि इससे देश की गुणवत्तायुक्त बीज प्रणाली को मजबूती मिलेगी, उन्नत प्रौद्योगिकियों के प्रसार में तेजी आएगी तथा किसानों की उत्पादकता और आय में वृद्धि होगी।

नई किस्मों की विशेषताओं की जानकारी देते हुए केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं आलू प्रजनन वैज्ञानिक डॉ. शैलेज सूद ने बताया कि कुफरी अभेद्य मध्यम अवधि (110–120 दिन) में तैयार होने वाली उच्च उत्पादकता वाली टेबल आलू की किस्म है, जो खरीफ  में 25–30 टन प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन देने में सक्षम है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें लेट ब्लाइट तथा पोटेटो सिस्ट निमेटोड (पीसीएन) के प्रति उच्च स्तर का प्रतिरोध पाया जाता है। 

भारतीय पर्वतीय क्षेत्रों में आलू उत्पादन को प्रभावित करने वाले इन दोनों प्रमुख जैविक कारकों के प्रति प्रतिरोधी यह देश की पहली उच्च उत्पादक किस्म है। इससे रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम होगी, उत्पादन लागत घटेगी तथा पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

 इसके पीले छिलके, गुलाबी छींटों वाले आकर्षक कंद, क्रीम रंग का गूदा तथा बेहतर भंडारण क्षमता इसे टेबल उपयोग के लिए अत्यंत उपयुक्त बनाती है।

डॉ. शैलेज सूद ने बताया कि दूसरी किस्म कुफरी रूबी को विशेष रूप से देश के मैदानी क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहे बेबी पोटेटो बाजार की मांग को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। यह मध्यम अवधि में तैयार होने वाली विशेष किस्म 23–25 टन प्रति हेक्टेयर उत्पादन देती है तथा मात्र 90 दिनों में लगभग 60 प्रतिशत कंद बेबी पोटेटो के रूप में प्राप्त होते हैं। यही विशेषता इसे प्रीमियम ताजा बाजार, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग तथा होटल एवं आतिथ्य क्षेत्र के लिए अत्यंत उपयुक्त बनाती है।

 इस किस्म को हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, बिहार, असम, अरुणाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल तथा महाराष्ट्र सहित देश के प्रमुख आलू उत्पादक राज्यों के लिए अधिसूचित किया गया है।