सफलता की कहानी: मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना से साकार हुआ बेसहारा बच्चों के अपने घर का सपना

सफलता की कहानी: मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना से साकार हुआ बेसहारा बच्चों के अपने घर का सपना
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अक्स न्यूज लाइन  मंडी, 28 जून :
हिमाचल प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना बेसहारा एवं अनाथ बच्चों के जीवन में नई उम्मीद लेकर आई है। यह योजना ऐसे बच्चों को न केवल शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन-यापन की सुविधाएं उपलब्ध करवा रही है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर भी प्रदान कर रही है।

प्रदेश सरकार की "सरकार ही माता, सरकार ही पिता" की भावना पर आधारित यह योजना उन बच्चों और युवाओं के लिए संबल बनी है, जिन्होंने कम आयु में अपने माता-पिता को खो दिया। योजना के अंतर्गत ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ को 27 वर्ष की आयु तक विभिन्न प्रकार की सहायता प्रदान की जा रही है।

उपमंडल सुंदरनगर में इस योजना के तहत अब तक 9 पात्र लाभार्थियों को गृह निर्माण के लिए 20 लाख रुपये, 6 लाभार्थियों को विवाह अनुदान के रूप में 12 लाख रुपये तथा तीन लाभार्थियों को स्वरोजगार के लिए 6 लाख रुपये की सहायता प्रदान की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त पात्र बच्चों को शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण, स्वरोजगार एवं अन्य सुविधाओं का लाभ भी दिया जा रहा है।

योजना की सफलता की कहानी सुंदरनगर उपमंडल के गांव कोहला, डाकघर कनैड निवासी गौरव के जीवन में आए सकारात्मक बदलाव से स्पष्ट होती है। गौरव ने बताया कि कई वर्ष पूर्व उनके माता-पिता का निधन हो गया था, जिसके बाद उनका जीवन संघर्षपूर्ण हो गया। उन्हें आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने बाल विकास परियोजना अधिकारी कार्यालय से संपर्क कर योजना के लिए आवेदन किया।

गौरव बताते हैं कि योजना के तहत उन्हें घर बनाने को तीन लाख रुपये तथा विवाह के लिए दो लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई। इस सहायता से उन्होंने अपना पक्का मकान तैयार कर लिया है और अब वह अपने घर में खुशी और सम्मान के साथ जीवन व्यतीत कर रहे हैं। वर्तमान में वह निजी नौकरी के साथ-साथ खेती-बाड़ी भी कर रहे हैं और आत्मनिर्भर जीवन जी रहे हैं।

गौरव कहते हैं, "मैं प्रदेश सरकार और विशेष रूप से मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू का आभार व्यक्त करता हूं, जिन्होंने हम जैसे बेसहारा बच्चों के लिए इतनी संवेदनशील योजना शुरू की। इस योजना ने हमें सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर प्रदान किया है।"

बाल विकास परियोजना अधिकारी सुंदरनगर पूनम चौहान ने बताया कि बाल विकास परियोजना सुंदरनगर के अंतर्गत 0 से 27 वर्ष आयु वर्ग के पात्र बच्चों को योजना का लाभ प्रदान किया जा रहा है। क्षेत्र में अब तक 40 अनाथ बच्चों की पहचान की गई है, जिन्हें प्रतिमाह 4,000 रुपये पॉकेट मनी दी जा रही है। इसके अलावा 4 बच्चों को उच्च शिक्षा, 4 को व्यावसायिक प्रशिक्षण, 3 को स्वरोजगार, 6 लाभार्थियों को विवाह अनुदान तथा 9 लाभार्थियों को गृह निर्माण सहायता प्रदान की गई है।

उन्होंने बताया कि स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए 3 लाभार्थियों को 2-2 लाख रुपये की दर से कुल 6 लाख रुपये की सहायता दी गई है। वहीं, 6 लाभार्थियों को विवाह अनुदान के रूप में कुल 12 लाख रुपये प्रदान किए गए हैं। इसके अतिरिक्त 9 लाभार्थियों को गृह निर्माण के लिए कुल 20 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। स्वरोजगार, विवाह अनुदान और गृह निर्माण मद के अंतर्गत लाभार्थियों को अब तक कुल 38 लाख रुपये की वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाई जा चुकी है।

मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अनाथ एवं बेसहारा बच्चों को आत्मसम्मान, सुरक्षा और बेहतर भविष्य का भरोसा भी प्रदान कर रही है। आज यह योजना ऐसे बच्चों के लिए आशा, विश्वास और उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक बनकर उभरी है। ‘सुक्खू सरकार’ की यह पहल हिमाचल को एक संवेदनशील और कल्याणकारी राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

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